26/11/11

जियो तो ऐसे जियो ,जैसे हर दिन आखरी हो


"जब मैं 17 साल का था तो मैंने  पढ़ा था जो कुछ ऐसा था ,' अगर आप हर दिन को इस  तरह जिए कि मानो वह आपका आखिरी दिन है तो एक दिन आप बिलकुल सही जगह होगे .'
इस वाक्य ने मुझ पर गहरा प्रभाव डाला और उसके बाद से यह मेरा नियम हो गया कि मैं हर दिन अपना चेहरा आईने में देखता हूँ और अपने आप से पूंछता हूँ ,अगर आज मेरी जिंदगी का आखरी दिन हो तो क्या मैं वह करना चाहूँगा जो मैं आज करने वाला हूँ और लगातार कई दिनों तक जब इसका जबाब नहीं होता है तो मैं समझ जाता हूँ कि मुझे कुछ बदलने की जरूरत है.
कोई भी मरना नहीं चाहता. यहाँ तक कि जिन लोगो को पता है कि स्वर्ग में जायेंगे , वो भी नहीं. फिर भी मृत्यु वो गंतव्य है , जो हम सभी के हिस्से में आती है . कोई कभी इससे बच नहीं सका है . यह सब वैसा ही है जैसा उसे होना चाहिए क्योंकि मृत्यु जीवन का एकमात्र सर्वोतम अविष्कार है. यह जीवन को बदलने वाला तत्व है. यह नए के लिया रास्ता बनाने के लिए पुराने को साफ़ करता है .
आपका समय बहुत सिमित है , इसलिए किसी दुसरे के जिन्दगी जीने में उसे बर्बाद न करे . मान्यताओं के शिकंजे में न फंसे - जिसमें आप उन परिणामों के साथ जीते है , जिसके बारे में दुसरे सोचते है . दुसरे के मत और विचारों के शोर से अपने अन्दर की आवाज को दबने न दे और सबसे महत्वपूर्ण बात, अपने दिल और पूर्वाभासों का अनुसरण करने का सहस रखे .ये दोनों किसी तरह पहले से ही जानते है की आप सच में क्या बनना चाहते है . बाकि सब बांते अप्रधान है."
(पैनक्रियाज के कैंसर से लडाई में जित हासिल करके लौटने के तुरंत बाद स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी में सन 2005 में एप्पल इंक के सी .इ .ओ. स्टीव जाब्स के कुछ शब्द )  

19/11/11

केंटुकी फ्राईड चिकेन

40 साल के उम्र कोर्बिन,केंटुकी से एक सर्विस स्टेशन पर कुछ यात्रियों के लिए खाना बनाना शुरू किया उस समय उनके पास अपना कोई रेस्टुरेंट नहीं था इसलिए उनको अपना चिकेन डिश आस-पास के घरों में जाकर पहुचना पड़ता था .धीरे-धीरे लोकप्रियता बढ़ी और 142  सीट वाले रेस्टुरेंट में तब्दील हुआ जिसका नाम "सांडर्स कैफे" था , और वो भी ठीक दो साल के बाद आग की वजह से जल कर खाक हो गया.पर हार नहीं माना जुलाई 4, 1940 को मोटेल के रूप में इसकी फिर शुरुवात हुयी .बिजनेस चलता रहा और वह व्यक्ति  अगले 9 -10 सालो तक एक सीक्रेट रेसिपी को विकसित करने में जुटा रहा जिससे चिकेन को पैन में फ्राई करने की बजाये दबाब से फ्राई किया जा सके. .
उन्होंने यह विधि तब खोजी थी जब वे रिटायर हो चुके थे ,अरबपति कर्नल सांडर्स (Harland David "Colonel" Sanders )  केंटुकी फ्राईड चिकेन के निर्माता और मालिक है . पैंसठ साल के उम्र में जब बिजनेस में पैसे की जरुरत पड़ी तो 105 डॉलर जो उन्हें रिटायरमेंट चेक के आधार पर बैंक से लोन के तौर पर मिले थे उससे काम चलाया .
आज 109 देशो में KFC लगभग 12 मिलियन  लोगो को रोज मुर्गे खिलाती है  और यह केवल परिणाम है एक  व्यक्ति के उसके अपने फैसले का कि उसे आखिर क्या हासिल करना है?

गौरतलब:आप क्या हासिल करना चाहते है ? आप क्या बनना चाहते है ?आप किस चीज़ के मालिक  बनना चाहते है ?यह मत कहियेगा की यह आप पर निर्भर नहीं करती या अब तो बहुत देर हो चुकी है .अपने जिंदगी के बारे में दुसरे आदमी को फैसला मत करने दीजिये .आप ही अकेले वयक्ति है जिसे यह फैसला करना चाहिए.

07/08/11

अपने ककून से संघर्ष



एक राहगीर को सड़क किनारे किसी झाड़ पर एक तितली का अधखुला कोकून(यह एक खोल होता है जिसमें से तितली का जन्म होता  है )  दिखा ।वहां बैठकर कुछ घंटे उस  तितली को देखता रहा जो छोटे से छिद्र से बहार निकलने के लिए जी-तोड़ कोशिश किये जा रही थी. पर उससे बाहर निकलते नहीं बन रहा था। ऐसा लग रहा था कि तितली का उससे बाहर निकलना सम्भव नहीं है।
उस आदमी ने सोचा कि तितली की मदद की जाए। उसने कहीं से एक कतरनी लाया  और तितली के निकलने के छेद को थोड़ा सा बड़ा कर दिया।अब  तितली उसमें से आराम से निकल सकती थी । लेकिन वह बेहद कमज़ोर लग रही थी और उसके पंख भी नहीं खुल रहे थे। आदमी बैठा-बैठा तितली के पंख खोलकर फडफडाने का इंतजार करता रहा।
लेकिन ऐसा नहीं हुआ।तितली ककून में ही फड़-फड़ाती रही पर तितली कभी नहीं उड़ पाई, और एक दिन मर गयी .
उस व्यक्ति को कुछ समझ नहीं आ रहा था कि ऐसा क्यों हुआ ?  उस आदमी ने मदद किया काम आसान की,फिर क्यों नहीं उड़  पायी ?
दरअसल उस राहगीर को यह नहीं मालुम था की तितली का यही संघर्ष उसे जिंदगी में उड़न भरने का मौका देता है. उससे  बाहर आने की प्रक्रिया में ही उस तितली के तंतु जैसे पंखों में पोषक द्रव्यों का संचार होता है , यह प्रकृति की व्यवस्था थी कि तितली  अथक प्रयास करने के बाद ही ककून  से  पुख्ता  होकर बाहर निकलती है .
इसी तरह हमें भी अपने जीवन में संघर्ष करने की ज़रूरत होती है। यदि प्रकृति और जीवन हमारी राह में किसी तरह की बाधाएं न आने दें तो हम सामर्थ्यवान कभी न बन सकेंगे। जीवन में यदि शक्तिशाली और सहनशील बनना हो तो कष्ट तो उठाने ही पड़ेंगे।

गौरतलब: जिंदगी में ऊँची उडान भरने  के लिए अपने ककून (कठिन परिस्थिति) से संघर्ष  जरुरी है ,संघर्ष जितना लम्बा और कठिन होगा  आपकी उपलब्धि उतनी बड़ी और  पुख्ता होगी.